उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mausamon ki saKHtiyan

मौसमों की सख़्तियाँ

موسموں کی سختیاں

शायर: Parvez akhtar10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौसमों की सख़्तियाँ
अल-हफ़ीज़-ओ-अल-अमाँ

बेवफ़ा है ये जहाँ
आगे तुम जानो मियाँ

शहर में दो-चार थे
क्या हुए आशुफ़्तगाँ

अब कोई मुसबत अमल
कब तलक आह-ओ-फ़ुग़ाँ

एक सहरा-ए-बसीत
तेरे मेरे दरमियाँ

रहम से आरी ज़मीं
और नाराज़ आसमाँ

क्यों उठाएँ ज़िल्लतें
किस को रहना है यहाँ

उड़ रही हैं चार सू
ज़िंदगी की धज्जियाँ

मा'रका है शेर-गोई
सहल मत जानो मियाँ

फिर वही काग़ज़ क़लम
फिर वही कार-ए-ज़ियाँ