उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi se kahin ji lagane se pahle

किसी से कहीं जी लगाने से पहले

کسی سے کہیں جی لگانے سے پہلے

शायर: Parvez akhtar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी से कहीं जी लगाने से पहले
ज़रा पूछ लेते ज़माने से पहले

क़यामत की बाबत बताते नहीं हो
न आने से पहले न जाने से पहले

ये दिल हैं ये आँखें बहुत मुज़्तरिब हैं
ठिकाने लगा जाओ जाने से पहले

भलाई भी थोड़ी सी झोली में होती
गुनाहों की जन्नत कमाने से पहले

तग़य्युर हर इक ज़िंदगी का मुक़द्दर
मैं रोया बहुत मुस्कुराने से पहले

किसी ने भी हासिल की बाबत न सोचा
ज़मीनों पे लाशें गिराने से पहले

बहुत चैन से ज़िंदगी कट रही थी
फ़रेब-ए-मोहब्बत में आने से पहले

यहाँ ज़िंदगी लहलहाती थी हर सू
यहाँ खेत थे कार-ख़ाने से पहले