उर्दू शायरी · ग़ज़ल

manzilen aain to raste kho gae

मंज़िलें आईं तो रस्ते खो गए

منزلیں آئیں تو رستے کھو گئے

शायर: Iffat Zarrin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंज़िलें आईं तो रस्ते खो गए
आबगीने थे कि पत्थर हो गए

बे-गुनाही ज़ुल्मतों में क़ैद थी
दाग़ फिर किस के समुंदर धो गए

उम्र भर काटेंगे फ़सलें ख़ून की
ज़ख़्म दिल में बीज ऐसा बो गए

देख कर इंसान की बेचारगी
शाम से पहले परिंदे सो गए

अन-गिनत यादें मेरे हमराह थीं
हम ही 'ज़र्रीं' दरमियाँ में खो गए