उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main sochta tha ki dega mujhe ujale kaun

मैं सोचता था कि देगा मुझे उजाले कौन

میں سوچتا تھا کہ دے گا مجھے اجالے کون

शायर: Zafar Naseemi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं सोचता था कि देगा मुझे उजाले कौन
ये कर गया मह-ओ-अंजुम मिरे हवाले कौन

नया जरीदा-ए-शेर-ओ-अदब निकाले कौन
यहाँ ख़रीद के पढ़ता है ख़ुद रिसाले कौन

चहार-सम्त मुंडेरों पे ज़ाग़ बैठे हैं
न जाने छीन ले मासूम के निवाले कौन

पिला के ख़ून-ए-जिगर दोस्तों को देख लिया
अब और दुश्मन-ए-जाँ आस्तीं में पाले कौन

पसीना बेच रहा हूँ लहू भी अर्ज़ां है
ख़रीदता है कफ़-ए-ख़ूँ-फिशाँ के छाले कौन

हज़ार तरह की ज़ेहनी अज़िय्यतें दे कर
पिला रहा है मुझे ज़हर के प्याले कौन

लगी हो नींद तो यारों को होशियार करें
ये मुर्दा लोग हैं मुर्दों में जान डाले कौन

ये रंग-ओ-नस्ल की तफ़रीक़ हम ने ख़ुद की है
वगर्ना एक हैं सब गोरे कौन काले कौन

किसी पुराने खंडर में ये लाशें दफ़ना दो
हवा ख़िलाफ़ है नेज़ों पे सर उछाले कौन