उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main samajh raha tha ki waqt ne tera nam dil se miTa diya

मैं समझ रहा था कि वक़्त ने तिरा नाम दिल से मिटा दिया

میں سمجھ رہا تھا کہ وقت نے ترا نام دل سے مٹا دیا

शायर: Aalam Nizami6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं समझ रहा था कि वक़्त ने तिरा नाम दिल से मिटा दिया
शब-ए-ग़म मगर तिरी याद ने मुझे आज फिर से रुला दिया

न है तीरगी से गिला कोई न है रौशनी की तलब मुझे
मिरी हसरतों के चराग़ को तिरी बे-रुख़ी ने बुझा दिया

ये मिरे ही ज़र्फ़ की बात थी न किसी से कुछ भी कहा मगर
तिरी फुर्क़तों का जो दर्द था मिरे आँसुओं ने बता दिया

मिरे हम-नशीं मिरे हम-नवा तुझे नज़्र क्या करूँ मैं बता
मिरा दिल भी मेरा नहीं रहा तिरे 'इश्क़ में ही लुटा दिया

न मसर्रतों से सुकून की कभी चंद साँसें 'अता हुईं
ग़म-ए-ज़िंदगी तिरा शुक्रिया मुझे तू ने जीना सिखा दिया

कहूँ उस को अच्छा या मैं बुरा नहीं होता मुझ से ये फ़ैसला
कभी दोस्ती ने वफ़ा किया कभी दोस्ती ने दग़ा दिया