उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main nae azm-e-safar se nikla

मैं नए अज़्म-ए-सफ़र से निकला

میں نئے عزم سفر سے نکلا

शायर: Zafar Naseemi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं नए अज़्म-ए-सफ़र से निकला
सर पे सूरज लिए घर से निकला

संग-दिल शख़्स के आँसू देखे
मोम पत्थर के जिगर से निकला

इस हवेली से कि इस गुम्बद से
देखना चाँद किधर से निकला

एक तो ख़ुद ही ख़बर थी जाँ-सोज़
फिर वो मतलब जो ख़बर से निकला

आमने-सामने थे दैर-ओ-हरम
मैं बहुत बच के उधर से निकला

दुश्मन-ओ-दोस्त को पहचान लिया
बूँद भर ख़ून तो सर से निकला