उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jo rakhta tha kitabon pe bharam TuT gae

मैं जो रखता था किताबों पे भरम टूट गए

میں جو رکھتا تھا کتابوں پہ بھرم ٹوٹ گئے

शायर: Ibraheem Khalil6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जो रखता था किताबों पे भरम टूट गए
दास्ताँ चीख़ उठी और क़लम टूट गए

आइना आईने के सामने टूटा तो मुझे
ऐसा लगता था कि दोनों ही बहम टूट गए

उन चराग़ों को जलाने की तमन्ना है मुझे
जिन चराग़ों पे हवाओं के सितम टूट गए

फ़ासला तूल पकड़ते ही शजर गिरने लगे
रास्ता दिल का उखड़ते ही क़दम टूट गए

रौशनी आइना-ख़ाने में थी क़ैदी की तरह
गर्दिशें खाती हुईं किरनों के दम टूट गए

दिल का पहलू में अभी टूटना बाक़ी था 'ख़लील'
हौसला हम से न हो पाया तो हम टूट गए