उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar-e-suKHan-arai hai tanhai hamari

कार-ए-सुख़न-आराई है तन्हाई हमारी

کار سخن آرائی ہے تنہائی ہماری

शायर: Ibraheem Khalil6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कार-ए-सुख़न-आराई है तन्हाई हमारी
हंगामा-ए-अफ़्लाक है शुनवाई हमारी

हम अहल-ए-सबा-ख़ानी-ओ-गुल-कार हैं फिर भी
होती रही इस शहर में रुस्वाई हमारी

गाँव की तरफ़ नक़्श-ए-कफ़-ए-पा थे हमारे
फिर शहर-ए-ख़ुश-आबाद को याद आई हमारी

तुम वारिस-ए-सहरा-ए-नुमू-यास हो लेकिन
ताबिंदा है उस रेत पे हरजाई हमारी

इक 'उम्र पस-ए-नीलमी पर्दे में गुज़ारी
तब जा के ज़मीं-ज़ाद को बास आई हमारी

बिस्तर मिरा क़िर्तास है मिसरे हैं मिरे ख़्वाब
तकमील-ए-ग़ज़ल होती है अंगड़ाई हमारी