उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jaanta hun ki sare bure nahin hote

मैं जानता हूँ कि सारे बुरे नहीं होते

میں جانتا ہوں کہ سارے برے نہیں ہوتے

शायर: Raakesh ulfat9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जानता हूँ कि सारे बुरे नहीं होते
मगर ये सच है कि सब एक से नहीं होते

मिरे परों में अगर हौसले नहीं होते
ये आसमाँ मेरे आगे झुके नहीं होते

मिरे सनम जो मुझे तुम मिले नहीं होते
सुकून-ए-दिल से मिरे राब्ते नहीं होते

ज़मीन पानी हवा देख भला सब कुछ है
न जाने क्यों मेरे बूटे हरे नहीं होते

ये तेरा क़द है जो रखता है अहमियत वर्ना
ख़ुश-आमदीद को सारे झुके नहीं होते

अदालतों से जुड़े सारे दावेदारों में
ये चुग़लियाँ हैं सही फ़ैसले नहीं होते

जो हो सके तो ज़बाँ को ज़रा सरल रखना
बहुत से नेता ज़ियादा पढ़े नहीं होते

मिरे ख़ुदा की इनायत अगर नहीं होती
मिरे चराग़ हवा में जले नहीं होते

तमाम उम्र कई लोग छोटे रहते हैं
बुलंदियों पे भी जा कर बड़े नहीं होते