उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main gam-gam pe jo sans-sans marta hun

मैं गाम-गाम पे जो साँस-साँस मरता हूँ

میں گام گام پہ جو سانس سانس مرتا ہوں

शायर: Daniyal Zaman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं गाम-गाम पे जो साँस-साँस मरता हूँ
ये ज़िंदगी वो तकब्बुर है जो मैं करता हूँ

सिरात-ए-हिज्र ख़त-ए-मुसतक़ीम होता है
मैं एक पर चलूँ तो दोनों से गुज़रता हूँ

ये शश-जिहात मिरे शानों पर ठहरते हैं
ये नक़्श बा'द में है पहले मैं उभरता हूँ

अजीब ख़ौफ़ है यकसानियत से बढ़ता है
तमाम रात मैं लोगों की तरह डरता हूँ

जनाब ने मन-ओ-सल्वा समझ लिया है मुझे
जो आसमान से उन के लिए उतरता हूँ

कोई नफ़ीस लबादा ही ज़ेब-ए-तन कर दो
मैं अच्छे कपड़े पहन कर अगर सँवरता हूँ