उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main aise chup jo khaDa hua hun mere azizo

मैं ऐसे चुप जो खड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

میں ایسے چپ جو کھڑا ہوا ہوں مرے عزیزو

शायर: Yasir Raza Asif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ऐसे चुप जो खड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो
ख़फ़ा हूँ ख़ुद से लड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

फ़लक पे उड़ने की आरज़ू का यही सिला है
ज़मीं पे मुर्दा पड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

इसी लिए तो मिरे सुख़न में ये तीखा-पन है
मैं हासिदों में बड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

सिसकते लोगों बिलकती रूहों को देखता हूँ
मैं फिर भी बेहिस खड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

मुझे बताते हो मौसमों का बदलना क्या है
बहार-रुत में झड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

कहानी कब की मैं पूरी कर के सुना भी देता
किसी जगह पर अड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो

मैं कौन हूँ किस तरह का हूँ ये उन्ही से पूछो
कि जिन दिलों में गड़ा हुआ हूँ मिरे 'अज़ीज़ो