उर्दू शायरी · ग़ज़ल

madar-e-hind ki azmat ka pata chalta hai

मादर-ए-हिन्द की 'अज़्मत का पता चलता है

مادر ہند کی عظمت کا پتہ چلتا ہے

शायर: Aalam Nizami7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मादर-ए-हिन्द की 'अज़्मत का पता चलता है
हुस्न-ए-कश्मीर से जन्नत का पता चलता है

क़तरा-ए-आब की क़ीमत का पता चलता है
धूप में प्यास की शिद्दत का पता चलता है

जब भी काँधों पे उठाता हूँ जनाज़ा कोई
ज़िंदगी तेरी हक़ीक़त का पता चलता है

पाँव हो जाते हैं जब राह-ए-वफ़ा में ज़ख़्मी
तब कहीं 'इश्क़ की 'अज़्मत का पता चलता है

'इल्म पर अपने बहुत जब कोई करता है ग़ुरूर
उस के अंदर की जहालत का पता चलता है

उस की तहक़ीक़ जब आती है ख़लाओं में नज़र
'इल्म इंसान की ताक़त का पता चलता है

जब नहीं मिलती हमें वक़्त-ए-ज़रूरत 'आलम'
तब किसी चीज़ की क़ीमत का पता चलता है