उर्दू शायरी · ग़ज़ल

luT gaya dil kahan nahin malum

लुट गया दिल कहाँ नहीं मा'लूम

لٹ گیا دل کہاں نہیں معلوم

शायर: Nadir Shahjahanpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लुट गया दिल कहाँ नहीं मा'लूम
क्या हुआ है ज़ियाँ नहीं मा'लूम

अब क़फ़स में ही रहने दे सय्याद
था कहाँ आशियाँ नहीं मा'लूम

तू ही आ कर सिखा दे ओ बुलबुल
मुझ को तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ नहीं मा'लूम

आप ही से फ़क़त है दिलचस्पी
और दिलचस्पियाँ नहीं मा'लूम

वाए तक़दीर क्या क़यामत है
जाए दर्द-ए-निहाँ नहीं मा'लूम

याद होने लगी कहाँ अपनी
आईं क्यूँ हिचकियाँ नहीं मा'लूम

मुझ को तेरी कहानी आती है
और कोई दास्ताँ नहीं मा'लूम

मैं अज़ल से फ़िदाई हूँ जिस का
उस का नाम-ओ-निशाँ नहीं मा'लूम

पैरव-ए-मीर हूँ मैं ऐ 'नादिर'
ग़ैर को ये ज़बाँ नहीं मा'लूम