उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lo wo aansu sujhai dene lage

लो वो आँसू सुझाई देने लगे

لو وہ آنسو سجھائی دینے لگے

शायर: Parveen Kaif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लो वो आँसू सुझाई देने लगे
दिन में तारे दिखाई देने लगे

मैं ने शिकवा किया था दुनिया का
क्यों तुम अपनी सफ़ाई देने लगे

मैं ने विर्से में हक़ जो माँग लिया
दुख मुझे मेरे भाई देने लगे

दर्द अपना कहूँ वो मुझ को अगर
अपने दिल तक रसाई देने लगे

मैं ने अच्छा कहा वफ़ा न रही
लोग मुझ को बुराई देने लगे