उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lipTe hain mujhse yaadon ke kuchh tar aur main

लिपटे हैं मुझ से यादों के कुछ तार और मैं

لپٹے ہیں مجھ سے یادوں کے کچھ تار اور میں

शायर: Ghazala Tabassum7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लिपटे हैं मुझ से यादों के कुछ तार और मैं
ठंडी हवाएँ सुब्ह की अख़बार और मैं

जगते रहे हैं साथ ही अक्सर तमाम शब
मेरी ग़ज़ल के कुछ नए अशआ'र और मैं

क्या जाने अब कहाँ मिलें कितने दिनों के बाद
लग जाऊँ क्या गले तिरे इक बार और मैं

अपनी लिखी कहानी को ही जी रही हूँ अब
इक जैसा ही तो है मिरा किरदार और मैं

पहले तो ख़ूब तलवों को छाले अता हुए
अब हम-सफ़र हैं रास्ता पुर-ख़ार और मैं

ग़म था न कोई इश्क़-ओ-मोहब्बत की फ़िक्र थी
जीते थे ज़िंदगी को मिरे यार और मैं

अक्सर ही करते रहते हैं ख़ामोश गुफ़्तुगू
लग कर गले से आज भी दीवार और मैं