उर्दू शायरी · ग़ज़ल

DhunDte DhunDte hum aapko thak jate hain

ढूँडते ढूँडते हम आप को थक जाते हैं

ڈھونڈتے ڈھونڈتے ہم آپ کو تھک جاتے ہیں

शायर: Ghazala Tabassum6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ढूँडते ढूँडते हम आप को थक जाते हैं
रास्ते दूर बहुत दूर तलक जाते हैं

कोई आता नहीं बोसीदा से मेरे घर में
कुछ परिंदे ही यहाँ आ के चहक जाते हैं

ऐब दहलीज़ पे दौलत की ढके होते हैं
मुफ़लिसी आती है तो पर्दे मसक जाते हैं

दौर-ए-हाज़िर की हवाओं का असर तो देखो
वक़्त से पहले ही फल बाग़ के पक जाते हैं

अह्द करते हैं न पीने का अलस्सुब्ह मगर
शाम के आते ही पैमाने छलक जाते हैं

आँसू रुख़्सार को छूने की तमन्ना ले कर
आँखों के कोर से गालों पे ढलक जाते हैं