उर्दू शायरी · ग़ज़ल

alam dil se nikal jae to shayad nind aa jae

अलम दिल से निकल जाए तो शायद नींद आ जाए

الم دل سے نکل جائے تو شاید نیند آ جائے

शायर: Ghazala Tabassum6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अलम दिल से निकल जाए तो शायद नींद आ जाए
दिल-ए-नादाँ बहल जाए तो शायद नींद आ जाए

पड़ी है कब से जाने ज़िंदगी बस एक ही करवट
अगर पहलू बदल जाए तो शायद नींद आ जाए

तुम्हारी दीद की चाहत में तकते हैं क़मर शब-भर
मिरी फ़ितरत बदल जाए तो शायद नींद आ जाए

मचल उठती है शब की बाँहों में आते ही हर चाहत
अगर हसरत सँभल जाए तो शायद नींद आ जाए

अभी तो शब जवाँ है आरज़ू भी है जवाँ अब तक
ज़रा सी रात ढल जाए तो शायद नींद आ जाए

हुई मुद्दत मुझे तो चैन से सोए हुए यारो
बदन से जाँ निकल जाए तो शायद नींद आ जाए