उर्दू शायरी · ग़ज़ल

andaz se alag nae tewar liye hue

अंदाज़ से अलग नए तेवर लिए हुए

انداز سے الگ نئے تیور لیے ہوئے

शायर: Ghazala Tabassum7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अंदाज़ से अलग नए तेवर लिए हुए
शीशे खड़े थे हाथ में पत्थर लिए हुए

मुमकिन है ये भी होगा किसी दौर में यहाँ
आएँगे फूल भी कभी नश्तर लिए हुए

जुगनू की हैसियत को न कम आंकिए जनाब
उड़ता फिरे है ख़ुद में इक अख़्तर लिए हुए

फिर से सजी हैं शाख़ें चमन में हैं रौनक़ें
आई बहार फूलों का ज़ेवर लिए हुए

आग़ाज़ हो रहा है नए इक सफ़र का फिर
आया है पेश-कश नई रहबर लिए हुए

किस बात का ग़ुरूर है मिलना है ख़ाक में
आए हैं आप ख़ाक का पैकर लिए हुए

कारीगरी कमाल की क़ुदरत की देख कर
हैरान हूँ मैं तितलियों के पर लिए हुए