उर्दू शायरी · ग़ज़ल

le gaya mujhse mujhe ruTh ke jaane wala

ले गया मुझ से मुझे रूठ के जाने वाला

لے گیا مجھ سے مجھے روٹھ کے جانے والا

शायर: Kafeel Aazar Amrohvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ले गया मुझ से मुझे रूठ के जाने वाला
काश ये हादिसा भी होता भुलाने वाला

फूल जब रोज़ किताबों में खिला करते थे
वो ज़माना नहीं अब लौट के आने वाला

अब दु'आओं से मुक़द्दर नहीं बदला करते
आप भी काम करें कोई ज़माने वाला

मुद्दतों पास समुंदर के रहा मैं लेकिन
एक क़तरा न मिला प्यास बुझाने वाला

अब फ़सादों की ख़बर सुन के लरज़ जाता हूँ
घर में बस एक ही बेटा था कमाने वाला

शहर आँखों का बहुत दिन से है सूना 'आज़र'
हादिसा कोई तो हो दिल को दुखाने वाला