उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lamhon mein zindagi ka safar yun guzar gaya

लम्हों में ज़िंदगी का सफ़र यूँ गुज़र गया

لمحوں میں زندگی کا سفر یوں گزر گیا

शायर: Ghaus Khah makhah Hyderabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लम्हों में ज़िंदगी का सफ़र यूँ गुज़र गया
साए में जैसे कोई मुसाफ़िर ठहर गया

मख़मूर था नशे में ग़म-ए-रोज़गार के
होश आ गया तो उम्र का पैमाना भर गया

दौलत भी उस के हाथ न आई तमाम-उम्र
कुछ नाम ही न अपना ज़माने में कर गया

सब उस के ख़ैर-ख़्वाह बुलंदी पे रह गए
शोहरत की सीढ़ियों से वो नीचे उतर गया

मौका-परस्त आब-ओ-हवा में न जी सका
अपनी अना की क़ैद में जाँ से गुज़र गया

मौत उस की सारी मुश्किलें आसान कर गई
इक बोझ ज़िंदगी का था सर से उतर गया

अफ़्सोस कम हुआ मगर हैरत बहुत हुई
जब 'ख़्वाह-मख़ाह' ऐन ज़ईफ़ी में मर गया