उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dukhega aur mera man na dekho

दुखेगा और मेरा मन न देखो

دکھے گا اور میرا من نہ دیکھو

शायर: Ghaus Khah makhah Hyderabadi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुखेगा और मेरा मन न देखो
बढ़ेगी और भी उलझन न देखो

हँसाता हूँ सभों को बस ये देखो
मिरा भीगा हुआ दामन न देखो

तुम अपने चाक-दामन की ख़बर लो
मिरा बोसीदा पैराहन न देखो

ख़ुद अपने आप से डर जाओगे तुम
अंधेरे में कभी दर्पन न देखो

न हर्फ़ आए कहीं मर्दांगी पर
बुरी नज़रों से हुस्न-ए-ज़न न देखो

अगर है हुस्न बे-पर्दा तो देखो
मगर तुम जानिब-ए-चिलमन न देखो

सही लिक्खो तो आँखें बंद कर लो
जो होती है कोई क़दग़न न देखो

फ़क़त तन्क़ीद ही करने की ख़ातिर
नज़र वालों किसी का फ़न न देखो

किसी बेकस की दुख़्तर ब्याह लाओ
शराफ़त देखो उस का धन न देखो

ये देखो घर में दीवारें हैं छत है
बड़ा-छोटा कभी आँगन न देखो