उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahje ko phul lafz ko jugnu agar karen

लहजे को फूल लफ़्ज़ को जुगनू अगर करें

لہجے کو پھول لفظ کو جگنو اگر کریں

शायर: Ghayas Mateen5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहजे को फूल लफ़्ज़ को जुगनू अगर करें
वक़्त-ए-रवाँ के साथ मआ'नी सफ़र करें

अंदर की बारिशों ने जो मंज़र दिखाए हैं
बाहर की धूप-छाँव को इस की ख़बर करें

मौसम परिंदे धूप की दीवार शब चराग़
क़िस्सा तवील होने लगा मुख़्तसर करें

अब नींद सी है नींद न अब ख़्वाब सा है ख़्वाब
सड़कों पे जाग जाग के उम्रें बसर करें

मंज़र को दरमियान से अपने हटा के देख
मुमकिन है फिर 'मतीन' की बातें असर करें