उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lagta nahin hai dil mera ujDe dayar mein

लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में

لگتا نہیں ہے دل مرا اجڑے دیار میں

शायर: Bahadur Shah Zafar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में
किस की बनी है आलम-ए-ना-पाएदार में

इन हसरतों से कह दो कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़-दार में

काँटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़बाँ
ये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में

बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला
क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल-ए-बहार में

कितना है बद-नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में