उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon mujhe log samajhte come hain

क्यों मुझे लोग समझते कम हैं

کیوں مجھے لوگ سمجھتے کم ہیں

शायर: Raakesh ulfat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों मुझे लोग समझते कम हैं
मेरे दिल में तो सभी के ग़म हैं

प्यार की एक ही रुत होती है
नफ़रतों के तो कई मौसम हैं

हम उन्हें झेल रहे हैं लेकिन
वो समझते हैं कि बुज़दिल हम हैं

तेल भी पूरा है बत्ती भी सही
जाने क्यों मेरे दिए मद्धम हैं

आप कुछ और न समझें 'उल्फ़त'
मेरी आँखें तो ख़ुशी से नम हैं