उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon kisi se ho shikayat aapko

क्यों किसी से हो शिकायत आप को

کیوں کسی سے ہو شکایت آپ کو

शायर: Iftikhar Raghib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों किसी से हो शिकायत आप को
आप ही से है मोहब्बत आप को

हर तरफ़ रक़्साँ फ़रेब-ए-इल्तिफ़ात
मुस्कुराने की है आदत आप को

जाने कब तक सब्र करना है हमें
जाने कब होगी नदामत आप को

क़ुव्वत-ए-बर्दाश्त मेरी कम न हो
और ख़ुदा रखे सलामत आप को

फ़र्क़ पड़ता कुछ तो करता अर्ज़ कुछ
क्या सुनाऊँ दिल की दुर्गत आप को

मुस्कुरा देता हूँ मैं तकलीफ़ में
और हो जाती है ज़हमत आप को

किस को 'राग़िब' अब वफ़ा का पास है
क्यों न हम समझें ग़नीमत आप को