उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon ho mujhse KHafa kaho to sahi

क्यों हो मुझ से ख़फ़ा कहो तो सही

کیوں ہو مجھ سے خفا کہو تو سہی

शायर: Aalam Nizami7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों हो मुझ से ख़फ़ा कहो तो सही
क्या है मेरी ख़ता कहो तो सही

हँसते हँसते छलक पड़ीं आँखें
कौन याद आ गया कहो तो सही

इस क़दर हम से बरहमी क्यों है
किस ने क्या कह दिया कहो तो सही

शीशा-ए-दिल को तोड़ कर मेरे
आप को क्या मिला कहो तो सही

किस ने किस को भुला दिया आख़िर
कौन है बे-वफ़ा कहो तो सही

जान-लेवा हैं हिज्र के लम्हे
अब न होंगे जुदा कहो तो सही

खोए खोए से रहते हो 'आलम'
ये तुम्हें क्या हुआ कहो तो सही