उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon hai lahja bujha bujha tera

क्यों है लहजा बुझा बुझा तेरा

کیوں ہے لہجہ بجھا بجھا تیرا

शायर: Iftikhar Raghib10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों है लहजा बुझा बुझा तेरा
क्या हुआ अब वो वलवला तेरा

वक़्फ़े वक़्फ़े से खोल कर खिड़की
अच्छा लगता है झाँकना तेरा

तेरी आँखों में झाँक कर देखूँ
अक्स मेरा हो आइना तेरा

क्या मनाएगा अपने दिल की ख़ैर
जिस से पड़ जाए वास्ता तेरा

तीर सा लग रहा है ग़ैरों को
मेरे शे'रों पे तब्सिरा तेरा

टूट जाए न डोर साँसों की
बाँध रक्खा है आसरा तेरा

जो भी मिलता था मरने वाला था
किस से करता मैं तज़्किरा तेरा

झाँक कर तेरी झुकती आँखों में
पढ़ लिया मैं ने फ़ैसला तेरा

कौन समझेगा मेरे दिल का हाल
किस ने देखा है देखना तेरा

जाने कब पिघले उन का दिल 'राग़िब'
जाने कब हल हो मसअला तेरा