उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya shikayat karen zamane se

क्या शिकायत करें ज़माने से

کیا شکایت کریں زمانے سے

शायर: Vikram Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या शिकायत करें ज़माने से
ये रहा यूँ भी बाज़ आने से

नींद आने की देर थी और फिर
उठ गया वो मिरे सिरहाने से

फूल आने लगे हैं शाख़ों पर
और चेहरे पे दाने दाने से

एक मुद्दत हुई है छोड़े दश्त
यूँ तो हैं क़ैस के घराने से

दिल के ज़ख़्मों को भूलना बेहतर
हो न जाएँ हरे गिनाने से

फिर नए लोग फिर नई महफ़िल
आप 'विक्रम' वही पुराने से