उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya kya na KHarab-o-KHwar Thahre

क्या क्या न ख़राब-ओ-ख़्वार ठहरे

کیا کیا نہ خراب و خوار ٹھہرے

शायर: Gauhar Hoshiyarpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या क्या न ख़राब-ओ-ख़्वार ठहरे
आख़िर सर-ओ-संग यार ठहरे

मक़्तल हो कि दश्त हो कि दफ़्तर
बे-कार तिरे ब-कार ठहरे

तुग़्यान-ए-हयात की दुहाई
ऐ काश ये जूएबार ठहरे

आशोब-ए-ख़बर 'अज़ाब ठहरा
आशुफ़्ता-ए-गीर-ओ-दार ठहरे

अब सिद्क़-रवी गुनाह ठहरी
अब कौन गुनाहगार ठहरे

मंज़िल की ख़बर न रास्ते की
अब जा के जहाँ ग़ुबार ठहरे

ये दर्द ये हम ये शे'र 'गौहर'
जाती है कहाँ बहार ठहरे