उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya hai shaqq-ul-qamar nazir to hai

क्या है शक़्क़-उल-क़मर नज़ीर तो है

کیا ہے شق القمر نظیر تو ہے

शायर: Parveen Kaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या है शक़्क़-उल-क़मर नज़ीर तो है
चाँद के दरमियाँ लकीर तो है

सोच सकती हूँ सच न कह पाऊँ
मुझ में जुरअत न हो ज़मीर तो है

वो किसी की नज़र नहीं न सही
दिल में पैवस्त इक तीर तो है

है वही काएनात की बुनियाद
गो वो इक ज़र्रा-ए-हक़ीर तो है

रौशनी माँगता है सूरज से
चाँद इक कासा-ए-फ़क़ीर तो है

'कैफ़' का जो भी हो अदब में मक़ाम
लहजा परवीन बे-नज़ीर तो है