उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya andhera hai kya ujala hai

क्या अंधेरा है क्या उजाला है

کیا اندھیرا ہے کیا اجالا ہے

शायर: Chandrashekhar Pandey Shams7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या अंधेरा है क्या उजाला है
ये नज़रिये का बस हवाला है

रंग बस एक ही है दुनिया में
'इश्क़ ने हुस्न पर जो डाला है

रोज़ सूरज सहर में घर आए
शाम को रोज़ घर-निकाला है

हैं धनक में जो दिखते सातों रंग
वो तबस्सुम ने तेरे डाला है

कौन खोलेगा दिल का वो कमरा
नाम का तेरे जिस पे ताला है

ज़िंदगी की किताब का पन्ना
एक उजला है एक काला है

'शम्स' कहती है जिस को ये दुनिया
वो मिरे दिल का एक छाला है