उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh to haalat ne diwana bana rakkha hai

कुछ तो हालात ने दीवाना बना रक्खा है

کچھ تو حالات نے دیوانہ بنا رکھا ہے

शायर: Tabassum Nigam Dehlvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ तो हालात ने दीवाना बना रक्खा है
और कुछ उन के तग़ाफ़ुल ने मना रक्खा है

ख़ौफ़-ए-शब ने मुझे दीवाना बना रक्खा है
मैं ने दिन ही से चराग़ों को जला रक्खा है

शौक़ से आप इसे तौहीन-ए-बहाराँ कहिये
मैं ने हर फूल से दामन को बचा रक्खा है

हरम-ओ-दैर से आगे है मिरा ज़ौक़-ए-तलब
आस्तान-ए-हरम-ओ-दैर में क्या रक्खा है

दर-ओ-दीवार से ज़ाहिर हैं तबाही के निशाँ
मैं ने ग़म-ख़ाने को ग़म-ख़ाना बना रक्खा है

जज़्ब हो जाता है ढलता है जो आँसू ऐ दोस्त
मैं ने दामन में सितारों को छुपा रक्खा है

ठेस लगते ही ये पैमाना छलक जाएगा
क्यों मिरे दिल को निगाहों से गिरा रक्खा है

सुन के रूदाद-ए-वफ़ा हँस के वो फ़रमाते हैं
ऐ 'तबस्सुम' तिरे अफ़्साने में क्या रक्खा है