उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jalwe kisi ke yun to numayan nahin rahe

जल्वे किसी के यूँ तो नुमायाँ नहीं रहे

جلوے کسی کے یوں تو نمایاں نہیں رہے

शायर: Tabassum Nigam Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जल्वे किसी के यूँ तो नुमायाँ नहीं रहे
लेकिन मिरी निगाह से पिन्हाँ नहीं रहे

हम ने भरी बहार में छोड़ा है गुलसिताँ
शर्मिंदा-ए-बहार गुलिस्ताँ नहीं रहे

दुनिया तो बे-ख़बर है मैं दुनिया को क्या कहूँ
तुम भी ये कह रहे हो परेशाँ नहीं रहे

बज़्म-ए-तसव्वुरात बड़ा काम कर गई
अब उन की बे-रुख़ी के भी इम्काँ नहीं रहे

जो मेरे साथ साथ रहे बह्र-ए-'इश्क़ में
मैं ग़र्क़ हो गया तो वो तूफ़ाँ नहीं रहे

दीवाने क़ैद-ओ-बंद से आज़ाद हो गए
ज़िंदाँ जुनूँ के दौर में ज़िंदाँ नहीं रहे

जोश-ए-जुनूँ तबस्सुम-ए-गुल कुछ न पूछिए
दामन का ज़िक्र क्या है गरेबाँ नहीं रहे