उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHizan bahaar ka unwan hai dekhiye kya ho

ख़िज़ाँ बहार का 'उनवाँ है देखिए क्या हो

خزاں بہار کا عنواں ہے دیکھیے کیا ہو

शायर: Tabassum Nigam Dehlvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़िज़ाँ बहार का 'उनवाँ है देखिए क्या हो
क़फ़स का नाम गुलिस्ताँ है देखिए क्या हो

नुमूद-ए-सुब्ह-ए-बहाराँ है देखिए क्या हो
अभी से चाक गरेबाँ है देखिए क्या हो

न आरज़ू-ए-हरम है न बुत-कदे का ख़याल
वो शोख़ हासिल-ए-ईमाँ है देखिए क्या हो

लगी हुई है चमन में इक आग सी हर-सू
बहार शो'ला-ब-दामाँ है देखिए क्या हो

जहान-ए-'इश्क़ में दा'वा था ज़ब्त का जिस को
वो आज चाक-गरेबाँ है देखिए क्या हो

न वो हयात के आसार हैं न वो रौनक़
उदास शम’-ए-शबिस्ताँ है देखिए क्या हो

सुना ये है कि मिरे घर फिर आ रहा है कोई
हयात आज ग़ज़ल-ख़्वाँ है देखिए क्या हो

अभी ग़ुरूब कहाँ आफ़्ताब-ए-जौर हुआ
अभी से जश्न-ए-चराग़ाँ है देखिए क्या हो

किसी तरह भी 'तबस्सुम' को अब क़रार नहीं
हयात सर-ब-गरेबाँ है देखिए क्या हो