उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh to duniya se kama le jaiye

कुछ तो दुनिया से कमा ले जाइए

کچھ تو دنیا سے کما لے جائیے

शायर: Tabish Mehdi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ तो दुनिया से कमा ले जाइए
हम फ़क़ीरों की दु'आ ले जाइए

हो सके तो उस की चौखट के लिए
सज्दा-ए-दिल-आश्ना ले जाइए

ये भी क्या कम है कि उस के शहर में
सिर्फ़ ज़ख़्मों की रिदा ले जाइए

अब चराग़ों से धुआँ उठने लगा
अब चराग़ों को उठा ले जाइए

सिर्फ़ उम्मीद-ए-वफ़ा पर 'उम्र भर
आस्तीं में साँप पाले जाइए

ताकि मैं ख़ुद से भी पोशीदा रहूँ
पर्दा आईने पे डाले जाइए

इस से ज़ालिम के बढ़ेंगे हौसले
यूँ न ज़ख़्मों को छुपा ले जाइए

और तो कुछ भी नहीं दिल के सिवा
जो भी है अच्छा बुरा ले जाइए