उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh ek log jo dil ke makan mein aae

कुछ एक लोग जो दिल के मकान में आए

کچھ ایک لوگ جو دل کے مکان میں آئے

शायर: Vikram Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ एक लोग जो दिल के मकान में आए
पुराने सानहे सब मेरे ध्यान में आए

मैं चाहता हूँ कि मेरा भरम रहे क़ाएम
नहीं भी हो तो कोई दरमियान में आए

दरख़्त-ए-दिल पे कोई 'उम्र भर नहीं ठहरा
बहुत से लोग यूँ तो साएबान में आए

पुराने सारे सबक़ याद कर के आया था
नए सवाल नए इम्तिहान में आए

कोई तो ऐसा हो जो मेरी चुप समझता हो
कभी तो मेरी ख़मोशी बयान में आए