उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh dil-nashin yaaden bhi hain kuchh dard ka rishta bhi hai

कुछ दिल-नशीं यादें भी हैं कुछ दर्द का रिश्ता भी है

کچھ دل نشیں یادیں بھی ہیں کچھ درد کا رشتہ بھی ہے

शायर: Naeem Sameer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ दिल-नशीं यादें भी हैं कुछ दर्द का रिश्ता भी है
मैं किस तरह भूलों उसे वो उम्र का हिस्सा भी है

ग़म में ख़ुशी की लहर क्यों आसूदगी में ज़हर क्यों
इस सोच में दरिया भी है इस फ़िक्र में सहरा भी है

वो वहम की तहरीर है वो ख़्वाब की तस्वीर है
मैं ने उसे देखा नहीं मैं ने उसे देखा भी है

कब तक मैं अपने आप से लड़ता रहूँ लड़ता रहूँ
मैं आख़िरश इंसान हूँ इंसान तो थकता भी है

नफ़रत किसी की याद से वहशत ख़ुद अपने आप से
वैसे तो यूँ होता नहीं लेकिन कभी होता भी है

अब तो 'समीर' इस दश्त में रहना है मुझ को उम्र भर
ये आख़िरी मंज़िल नहीं ये आख़िरी रस्ता भी है