उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh bhi achchha nahin hua mere sath

कुछ भी अच्छा नहीं हुआ मिरे साथ

کچھ بھی اچھا نہیں ہوا مرے ساتھ

शायर: Parvez Shaikh4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ भी अच्छा नहीं हुआ मिरे साथ
जब से तू ने किया गिला मिरे साथ

सोचता था के वो मिरा है फ़क़त
जिस ने अच्छा नहीं किया मिरे साथ

उस को मा'लूम था ग़रीब हूँ मैं
'इश्क़ का ढोंग क्यों रचा मिरे साथ

सब ने 'परवेज़' से नज़र फेरी
वो अकेला था जो हँसा मिरे साथ