उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dip chupke se jalane aae

दीप चुपके से जलाने आए

دیپ چپکے سے جلانے آئے

शायर: Parvez Shaikh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दीप चुपके से जलाने आए
जब तिरे ख़्वाब सुहाने आए

हम ने चाहा था भुला दें उन को
पर वही याद दिलाने आए

ज़िक्र जब छेड़ा वफ़ाओं का कभी
लोग कुछ दाग़ दिखाने आए

रात भर चाँद से बातें कीं है
सुब्ह आँसू ये बताने आए

वक़्त क्या आया हमारा कुछ लोग
राह में काँच बिछाने आए

उस की चौखट से गुज़रते ही मुझे
याद कुछ ज़ख़्म पुराने आए

वा'दा-ए-वस्ल किया था 'परवेज़'
काश वा'दा वो निभाने आए