उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi qarib na aae shikasta-pa hun main

कोई क़रीब न आए शिकस्ता-पा हूँ मैं

کوئی قریب نہ آئے شکستہ پا ہوں میں

शायर: Mahboob Khizan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई क़रीब न आए शिकस्ता-पा हूँ मैं
करम तो है मगर अंजाम देखता हूँ मैं

मिरी निगाह में कुछ और ढूँडने वाले
तिरी निगाह में कुछ और ढूँडता हूँ मैं

ज़माना देर-फ़रामोश तो नहीं इतना
ये ठीक है कि बहुत देर-आश्ना हूँ मैं

ग़लत नहीं वो जो शिकवे अब आप को होंगे
बदल गया है ज़माना बदल गया हूँ मैं

मुझे सताओ नहीं ज़िंदगी निगाह में है
फ़रेब खाओ नहीं तुम को जानता हूँ मैं

मिरा ग़ुरूर-ए-मोहब्बत कि मैं नहीं समझा
तिरी नज़र ने कहा था कि दिलरुबा हूँ मैं