उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi pal ji uThe agar hum bhi

कोई पल जी उठे अगर हम भी

کوئی پل جی اٹھے اگر ہم بھی

शायर: Naeem Raza Bhatti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई पल जी उठे अगर हम भी
दम न ले पाएगा यहाँ दम भी

कार-ए-बेकार का असासा है
मुझ से बे-जान के सिवा ग़म भी

क्या मिरे बस में कुछ नहीं रक्खा
ग़ैब से आएगा अगर नम भी

जिस जगह अपनी बेबसी हँस दे
ख़ाक कर पाएगा वहाँ रम भी

अपनी बे-ए'तिदालियों के सबब
मैं अगर बढ़ गया हुआ कम भी