उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat ye hai ki baat koi nahin

बात ये है कि बात कोई नहीं

بات یہ ہے کہ بات کوئی نہیں

शायर: Naeem Raza Bhatti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात ये है कि बात कोई नहीं
मैं अकेला हूँ साथ कोई नहीं

अब सुहुलत पे ही क़नाअ'त है
हवस-ए-मुम्किनात कोई नहीं

बरगुज़ीदा है मेरा साया भी
मेरे साए में हाथ कोई नहीं

ख़ौफ़ आए तो खाँस लेता हूँ
यानी फ़ितरत में घात कोई नहीं

एक हद में रखा गया है मुझे
और हद से नजात कोई नहीं