उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-e-durwesh ki dua se uTha

दिल-ए-दरवेश की दुआ से उठा

دل درویش کی دعا سے اٹھا

शायर: Naeem Raza Bhatti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ए-दरवेश की दुआ से उठा
ये हयूला सा जो हवा से उठा

जिस्म उलझा मगर थकन उतरी
पर जो इक कर्ब नहरवा से उठा

नश्शा-ए-ख़्वाब बअ'द में उतरा
पहले ख़ुशनूदी-ए-वला से उठा

शहर-ए-सर-मस्त में शफ़क़ उतरी
और मंज़र कोई वरा से उठा

इस को मैं इंक़लाब कहता हूँ
ये जो इंकार की फ़ज़ा से उठा