उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi nam hai na koi nishan mujhe kya hua

कोई नाम है न कोई निशाँ मुझे क्या हुआ

کوئی نام ہے نہ کوئی نشاں مجھے کیا ہوا

शायर: Faizi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई नाम है न कोई निशाँ मुझे क्या हुआ
मैं बिखर गया हूँ कहाँ कहाँ मुझे क्या हुआ

किसे ढूँडता हूँ मैं अपने क़ुर्ब-ओ-जवार में
ऐ फ़िराक़-ए-सोहबत-ए-दोस्ताँ मुझे क्या हुआ

ये कहाँ पड़ा हूँ ज़मीं के गर्द-ओ-ग़ुबार में
वो कहाँ गया मिरा आसमाँ मुझे क्या हुआ

कोई रात थी कोई चाँद था कई लोग थे
वो 'अजब समाँ था मगर वहाँ मुझे क्या हुआ

मिरे रू-ब-रू मुझे मैं दिखाई नहीं दिया
मिरे आइने मिरे राज़-दाँ मुझे क्या हुआ