उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is liye dil bura kiya hi nahin

इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं

اس لیے دل برا کیا ہی نہیں

शायर: Faizi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं
ज़िंदगी मेरा फ़ैसला ही नहीं

इस क़दर शोर था मिरे सर में
अपनी आवाज़ पर रुका ही नहीं

बड़ी ख़्वाहिश थी मुझ को होने की
हो गया हूँ तो कुछ हुआ ही नहीं

ज़ुल्म करता हूँ ज़ुल्म सहता हूँ
मैं कभी चैन से रहा ही नहीं

पड़ गया है ख़ुदा से काम मुझे
और ख़ुदा का कोई पता ही नहीं

तोड़ डालो ये हाथ पाँव मिरे
जिस्म का तो मुक़ाबला ही नहीं

तुम कहाँ हो ज़रा सदा तो दो
इस से आगे तो रास्ता ही नहीं