उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi ho chehra shanasa dikhai deta hai

कोई हो चेहरा शनासा दिखाई देता है

کوئی ہو چہرہ شناسا دکھائی دیتا ہے

शायर: Ejaz Obaid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई हो चेहरा शनासा दिखाई देता है
हर इक में एक ही मुखड़ा दिखाई देता है

उसी शजर पे शफ़क़ का करम है शायद आज
वो इक शजर जो सुनहरा दिखाई देता है

उधर वो देखो कि आकाश कितना दिलकश है
जहाँ वो धरती से मिलता दिखाई देता है

दिखाएँ तुम को ग़ुरूब आफ़्ताब का मंज़र
यहाँ उफ़ुक़ का किनारा दिखाई देता है

वही तो है जो मिरी जुस्तुजू की मंज़िल है
कोई भी शख़्स जो मुझ सा दिखाई देता है