उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi be-nam KHalish uksae

कोई बे-नाम ख़लिश उकसाए

کوئی بے نام خلش اکسائے

शायर: Yaqoob Rahi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई बे-नाम ख़लिश उकसाए
क्या ज़रूरी है तिरी याद आए

तेरी आँखों के बुलावे की किरन
क्यूँ मिरी राहगुज़र बन जाए

ज़िंदगी दश्त-ए-सफ़र धूप ही धूप
तेरे बिन कैसे कहाँ के साए