उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud pe ilzam kyun dharo baba

ख़ुद पे इल्ज़ाम क्यूँ धरो बाबा

خود پہ الزام کیوں دھرو بابا

शायर: Yaqoob Rahi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद पे इल्ज़ाम क्यूँ धरो बाबा
ज़िंदगी मौत है मरो बाबा

रेत ख़्वाबों की हो कि दर्द के फूल
अपनी झोली में कुछ भरो बाबा

ख़ौफ़ की धुँद घेर लेगी तुम्हें
क्या ज़रूरी है तुम डरो बाबा

जंग जब उन से लाज़मी ठहरे
उन से फिर जंग ही करो बाबा