उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kohna aqdar se koi haT jae to

कोहना अक़दार से कोई हट जाए तो

کہنہ اقدار سے کوئی ہٹ جائے تو

शायर: Faisal Tufail6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोहना अक़दार से कोई हट जाए तो
पैरहन जो पुराना है फट जाए तो

जिस निगह ने सँवरना सिखाया उसे
वो निगह उस के चेहरे से हट जाए तो

कुछ लचक रौशनी के लिए भी रखो
रात अपने ही मौक़िफ़ पे डट जाए तो

क्या अभी भी क़यामत नहीं आएगी
जब ज़मीं अपने महवर से हट जाए तो

मुंतज़िर तेरी आमद का अब भी हूँ मैं
गर चराग़ों की लौ ही सिमट जाए तो

फिर ख़यानत का एहसास बढ़ने लगे
मुझ में मेरी कमी थोड़ी घट जाए तो