उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi se fikr kisi se nazar mile na mile

किसी से फ़िक्र किसी से नज़र मिले न मिले

کسی سے فکر کسی سے نظر ملے نہ ملے

शायर: Vaqar Faruqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी से फ़िक्र किसी से नज़र मिले न मिले
सफ़र है शर्त कोई हम-सफ़र मिले न मिले

सुकूँ से काट लें कुछ और भी बहार के दिन
फिर इस के बाद क़फ़स मो'तबर मिले न मिले

ख़ुद अपने साए में कुछ देर बैठ कर दम लें
हमारी राह में कोई शजर मिले न मिले

ख़ुशी का लम्हा कोई राएगाँ न जाने दो
ये ना-मुराद कभी वक़्त पर मिले न मिले

चलो कि मंज़िलें हम को पुकारती हैं 'वक़ार'
न इंतिज़ार करो राहबर मिले न मिले